रायसेन जिले मिले 354 फ्लोराइड से प्रभावित गाँव ,कलेक्टर ने दिए पानी जांचने के सख्त निर्देश
कुमार राजेश रायसेन
मप्र – रायसेन जिले में फ्लोरोसिस बीमारी जिसमे हड्डियों और दांतों का रोग होता है जिसकी रोकथाम और नियंत्रण के लिए कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने जिला स्तरीय समन्वय बैठक ली। जिले के 354 गांव फ्लोराइड से बुरी तरह प्रभावित हैं और स्वास्थ्य विभाग की जांच में 393 बच्चों में डेंटल फ्लोरोसिस की पुष्टि हो चुकी है। हालात की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर ने प्रभावित क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने और स्कूलों के शिक्षकों से लेकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तक को पानी जांचने की ट्रेनिंग देने के सख्त निर्देश दिए हैं।बैठक में सामने आया कि जिले के लगभग 354 गांव फ्लोराइड के पानी से प्रभावित हैं। इनमें सबसे ज्यादा बेगमगंज के 107 गांव शामिल हैं। इसके अलावा सिलवानी के 93, गैरतगंज के 88, बरेली के 30, उदयपुरा के 20, सांची के 10 और औबेदुल्लागंज के 2 गांवों के भूजल में फ्लोराइड की मात्रा अधिक पाई गई है। अभी तक 3493 बच्चों की जांच है जिसमे 393 में फ्लोरोसिस कन्फर्म स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अब तक 106 गांवों का दौरा कर 3493 बच्चों और ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया है। इनमें से 1114 बच्चों में संभावित डेंटल फ्लोरोसिस के लक्षण मिले थे। विस्तृत जांच के बाद 393 बच्चों में फ्लोरोसिस की पुष्टि हुई है। फिलहाल, स्वास्थ्य विभाग द्वारा इन प्रभावित बच्चों को कैल्शियम और विटामिन-सी की दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। कलेक्टर ने कहा कि शिक्षक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता करेंगे पानी की जांच जन जागरूकता को सबसे अहम मानते हुए कलेक्टर ने निर्देश दिया है कि आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ जिले के सभी स्कूलों के कम से कम एक शिक्षक को पानी की जांच के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाए। इन सभी को फील्ड टेस्टिंग किट भी बांटी जाएगी, ताकि ग्रामीण और स्कूली स्तर पर ही पानी की गुणवत्ता की प्रारंभिक जांच सुनिश्चित की जा सके।
PHE विभाग को दिए निर्देश कि असुरक्षित जलस्रोतों को चिन्हित करें
कलेक्टर ने पीएचई (PHE) विभाग के कार्यपालन यंत्री गिरीश कामले को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों के सभी नलकूपों और ट्यूबवेल के पानी की नियमित जांच की जाए। फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल के नमूनों की जांच कर असुरक्षित स्रोतों को चिन्हित किया जाए और ग्रामीणों को हर हाल में फ्लोराइड मुक्त शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।

