रायसेन मप्र – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निचले तपके और किसानों के लिए सौर ऊर्जा प्लांट की महत्वाकांक्षी योजनाओं को प्रशासन के आला अधिकारी पलीता लगा रहे है । ऐसा ही मामला रायसेन जिले से आया है जहाँ एक महिला किसान ने पीएम कुसुम ए के अंतर्गत 2 मेगा बाट का सौर ऊर्जा प्लान 9 करोड़ 20 लाख की कीमत से बनाया है जिससे 12 हजार यूनिट प्रतिदिन का उत्पादन होगा । बहिं महिला किसान भारती रैकवार ने अपनी सारी पूंजी एवं बैंक से लोन लेकर इस सौर ऊर्जा प्लांट को बनाया है । लेकिन आज दिनाक तक शुरू नही होने के चलते 9 लाख महीने बैंक की लोन क़िस्त भरना पड़ रहा है बही प्लांट शुरू नही होने से लगभग 40 हजार का नुकसान हो रहा है । बही प्लांट शुरू नही होने से परेशान महिला किसान और उसका पति इक्छा मृत्यु का आवेदन लेकर पहुँचे कलेक्ट्रेट …… रायसेन जिले से ऐसा ही मामला सामने आया है जहां जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर की दूरी पर ग्राम भुसीमेटा में महिला किसान भारती रैकवार ने 2 मेगावाट का सोलर प्लांट बैंक से 6 करोड़ लोन लेकर एवं 3 करोड़ से ज्यादा रकम खुद से ओर रिश्तेदारों से लेकर लगाई ।प्लांट पूरी तरह बनकर तैयार है। नकतरा सब स्टेशन तक बिजली पहचाने पोल लग गए । लेकिन रायसेन बिधुत बिभाग के अधिकारी की मनमर्जी से यह प्लांट अधर में लटका है दरअसल 20 जनवरी को एमटीसीएल से प्लांट शुरू करने मीटर लगाने बिधुत बिभाग को पत्र आया शाम चार बजे बिधुत बिभाग के अधिकारी अंकुर सेठ के पास यह पत्र आया लेकिन शाम होने की बजह से सोलर प्लांट पर कर्मचारी नही भेजे दूसरे दिन अधिकारी ने एमटीसीएल से मार्गदर्शन के लिए पत्र लिख दिया एक माह होने को आया महिला किसान आफिस आफिस चक्कर लगा रही है । क्या यही है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना। जो कभी खत्म नहीं होती और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना निरंतर पुनः पूर्ति करे इसके लिए प्रधानमंत्री ने देश प्रदेश में सोलर प्लांट लगाने के लिए बैंकों से कर्ज मुहैया कराया लेकिन मैदानी अधिकारी कर्मचारी खुद के लाभ के लिए इस योजना को पलीता लगाते नजर आ रहे है । अकेले रायसेन जिले में 2 मेगावाट के 6 से 7 प्रोजेक्ट लगाए गए किसानों ने अपनी 6 से 7 एकड़ जमीन इसमें लगाई लेकिन काम पूरा हो जाने के बाद बिधुत बिभाग इनमें मीटर नही लगा रहे जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है । महिला किसान भारती रैकवार ने आज कलेक्ट्रेट पहुच कर एडीएम मनोज उपाध्याय को आवेदन दिया जिसमें उन्होंने इच्छा मृत्यु की माग की एडीएम ने तुरंत बिधुत बिभाग के ऐ.सी. अंकुर सेठ से फोन पर बात की लेकिन अंकुर सेठ ने एडीएम को मार्गदर्शन के लिए लिखने की बात कही महिला किसान तो बिधुत बिभाग के अधिकारी पर रिश्वत मांगने का आरोप लगा रही है । महिला किसान का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही के कारण उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यदि समय रहते प्लांट चालू नहीं किया गया तो परिवार के सामने गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। अब सवालो के घेरे में प्रशासन के अधिकारी मगर प्रशासन के अधिकारियों पर नहीं पड़ रहा कोई असर । देश के यशस्वी प्रधानमंत्री की सौर ऊर्जा सरकार योजनाओं को जनहित में लागू कर रही है, तो आखिर जमीनी स्तर पर ऐसी लापरवाही क्यों? यदि इस बीच कोई अप्रिय घटना होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी? फिलहाल महिला किसान प्रशासन से न्याय की आस लगाए बैठी है।
